रोकथाम

ब्रश करने का सही तरीक़ा और कौन-सा टूथपेस्ट सचमुच काम करता है

लेखक: डॉ. प्रियंका त्रिपाठी, MDS · 21 जुलाई 2026 · 8 मिनट

"मैं तो रोज़ ब्रश करता हूँ, फिर भी कीड़ा लग गया।" यह शिकायत हम लगभग रोज़ सुनते हैं — और यह सच भी है। समस्या ब्रश करने में नहीं, ब्रश करने के तरीक़े में होती है। कुछ छोटी बातें बदलने से ही अधिकांश लोगों की दंत समस्याएँ काफ़ी घट जाती हैं।

सबसे पहले: ब्रश का काम क्या है

ब्रश का असली काम खाना निकालना नहीं है — वह तो कुल्ले से भी निकल जाता है। ब्रश का काम है दाँतों पर बनने वाली चिपचिपी बैक्टीरिया की परत (प्लाक) को तोड़ना, ख़ासकर वहाँ से जहाँ वह सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है — मसूड़े और दाँत की सीमा पर

यही वह जगह है जिसे ज़्यादातर लोग छोड़ देते हैं। लोग दाँतों की चौड़ी सतह ज़ोर से रगड़ते हैं और उस बारीक रेखा को छू भी नहीं पाते जहाँ से मसूड़ों की बीमारी शुरू होती है।

सही तकनीक — चार बातें

  1. ब्रश को 45 डिग्री के कोण पर रखें, इस तरह कि उसके रेशे दाँत और मसूड़े की सीमा की ओर हल्के से झुके हों — सीधे दाँत पर सपाट नहीं।
  2. छोटे, हल्के, गोल-गोल घुमाव बनाएँ। लंबे, ज़ोरदार, आगे-पीछे के स्ट्रोक सबसे बड़ी ग़लती हैं — वे मसूड़े पीछे धकेलते हैं और दाँत की गर्दन घिसा देते हैं।
  3. हर सतह को समय दें — बाहरी, भीतरी और चबाने वाली। भीतरी सतह, ख़ासकर नीचे के आगे के दाँतों की, सबसे ज़्यादा छूट जाती है — और वहीं सबसे ज़्यादा टार्टर जमता है।
  4. दो मिनट पूरे करें। मुँह को चार हिस्सों में बाँटें और हर हिस्से को 30 सेकंड दें।
ज़ोर नहीं, दिशा: प्लाक बहुत नरम होती है — उसे हटाने के लिए ताक़त नहीं चाहिए, सही जगह पर ब्रश पहुँचना चाहिए। ज़ोर से ब्रश करने से प्लाक ज़्यादा नहीं हटती, बस दाँत और मसूड़े घिसते हैं। अगर आपका ब्रश तीन महीने से पहले ही फैल जाता है, तो आप ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर लगा रहे हैं।

ब्रश कौन-सा चुनें

  • हमेशा मुलायम (soft) ब्रश — मध्यम या कड़ा ब्रश दाँत घिसाता और मसूड़े हटाता है। "कड़े ब्रश से ज़्यादा सफ़ाई होती है" पूरी तरह ग़लत धारणा है
  • छोटा सिर — जो पीछे की दाढ़ों तक आसानी से पहुँच सके
  • हर तीन महीने पर बदलें, या रेशे फैलने पर उससे पहले
  • बीमारी के बाद ब्रश बदल दें
  • बैटरी वाला ब्रश ज़रूरी नहीं, पर जिनकी पकड़ कमज़ोर है या जो तकनीक ठीक नहीं कर पाते, उनके लिए उपयोगी है

टूथपेस्ट: सिर्फ़ एक चीज़ मायने रखती है

विज्ञापन बहुत सारे दावे करते हैं, पर वैज्ञानिक रूप से टूथपेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण तत्व एक ही है — फ़्लोराइड। यही वह चीज़ है जो इनैमल को मज़बूत करती है और शुरुआती कीड़े को पलटने में मदद करती है। बाक़ी सब — नमक, नीम, चारकोल, हर्बल — मुख्य रूप से स्वाद और विपणन हैं।

पैकेट पर देखें कि फ़्लोराइड है या नहीं। कई "हर्बल" या "प्राकृतिक" टूथपेस्ट में फ़्लोराइड होता ही नहीं — यानी उनमें वह तत्व नहीं जो असल में काम करता है।

  • वयस्क: मटर के दाने बराबर
  • 3–6 साल के बच्चे: मटर के दाने से कम, और निगरानी में
  • 3 साल से छोटे बच्चे: चावल के दाने बराबर, बहुत थोड़ा
बिहार के लिए एक ज़रूरी बात: इस क्षेत्र के कुछ इलाक़ों के भूजल में फ़्लोराइड पहले से अधिक है। ऐसी जगहों पर बच्चों को अतिरिक्त फ़्लोराइड (गोली या सप्लीमेंट) डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल न दें, और उन्हें टूथपेस्ट निगलने से रोकें। विस्तार से पढ़ें: दाँतों पर दाग़ (फ्लोरोसिस)

वह एक आदत जो सबसे कम लोगों को पता है

ब्रश करने के बाद पानी से बार-बार कुल्ला न करें। बस अतिरिक्त झाग थूक दें।

कारण सीधा है: टूथपेस्ट का फ़्लोराइड दाँतों की सतह पर टिककर काम करता है। ज़ोर से कुल्ला करते ही वह पूरा धुल जाता है और उसका बड़ा हिस्सा बेकार चला जाता है। थोड़ा-सा झाग मुँह में छोड़ देना उसे और देर तक काम करने देता है। यह एक छोटा-सा बदलाव है जो सालों में बड़ा फ़र्क़ बनाता है।

ब्रश काफ़ी नहीं है

ब्रश दाँत की तीन सतहें साफ़ करता है, पर दो सतहें — जो दो दाँतों के बीच में होती हैं — वह छू भी नहीं पाता। यानी ब्रश से मुँह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा साफ़ ही नहीं होता। और कीड़ा तथा मसूड़ों की बीमारी सबसे ज़्यादा वहीं से शुरू होती है।

  • फ़्लॉस — दिन में एक बार, अधिमानतः रात को
  • इंटरडेंटल ब्रश — जिनके दाँतों के बीच जगह अधिक है, उनके लिए फ़्लॉस से आसान और असरदार
  • दाँत कुरेदने के लिए सुई, पिन या तार का उपयोग बिल्कुल न करें — ये मसूड़ों को स्थायी नुक़सान पहुँचाते हैं

जीभ की सफ़ाई

जीभ की सतह पर बैक्टीरिया की मोटी परत जमती है, जो साँसों की दुर्गंध का सबसे बड़ा कारण है। ब्रश या जीभी से आगे से पीछे की ओर हल्के से साफ़ करें — ज़ोर से रगड़ने की ज़रूरत नहीं। साँसों की दुर्गंध पर विस्तृत लेख यहाँ है

आम ग़लतियाँ — एक नज़र में

  • कड़े ब्रश से ज़ोर लगाकर आगे-पीछे रगड़ना
  • ब्रश के बाद ज़ोर से कुल्ला करना
  • रात को ब्रश न करना
  • खट्टा या तेज़ाबी खाने के तुरंत बाद ब्रश करना (आधा घंटा रुकें)
  • महीनों तक वही फैला हुआ ब्रश इस्तेमाल करना
  • मंजन, कोयला, राख या नमक-सरसों का उपयोग — यहाँ पढ़ें क्यों
  • सिर्फ़ ब्रश पर भरोसा करना, बीच की सफ़ाई न करना

सही तरीक़ा एक बार सीख लेना जीवनभर काम आता है। जनता डेंटल क्लिनिक, मुज़फ़्फ़रपुर में जाँच के समय हम आपको आपके अपने दाँतों पर ब्रशिंग का सही तरीक़ा दिखाते हैं। संपर्क करें — कॉल करें: 95726 63116

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ब्रश कितनी देर करना चाहिए?

दो मिनट, दिन में दो बार। अधिकांश लोग असल में 40–50 सेकंड ही ब्रश करते हैं, जबकि उन्हें लगता है कि दो मिनट हो गए। एक बार घड़ी लगाकर देखें — फ़र्क़ चौंकाने वाला होता है। मुँह को चार हिस्सों में बाँटकर हर हिस्से को 30 सेकंड देना सबसे आसान तरीक़ा है।

ब्रश के बाद कुल्ला करना चाहिए या नहीं?

ब्रश के बाद ज़्यादा कुल्ला न करें। थूक दें, पर पानी से बार-बार कुल्ला करने से टूथपेस्ट का फ़्लोराइड धुल जाता है, जो असल में दाँतों की रक्षा करने वाला तत्व है। थोड़ा-सा झाग मुँह में रहने देना ज़्यादा फ़ायदेमंद है। यह छोटी-सी आदत बड़ा फ़र्क़ डालती है।

रात और सुबह में कौन-सा ब्रश ज़्यादा ज़रूरी है?

रात वाला। सोते समय लार बनना बहुत घट जाती है, और लार ही दाँतों की प्राकृतिक सुरक्षा है। इसलिए रात भर मुँह में बचा खाना और बैक्टीरिया सबसे ज़्यादा नुक़सान करते हैं। अगर किसी दिन एक ही बार ब्रश हो पाए, तो वह रात का होना चाहिए।

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