रोकथाम
गुल, मंजन, दातून या कोयला: कौन-सी पुरानी आदतें आपके दाँतों को नुक़सान पहुँचाती हैं?
बिहार में दाँत कई पुराने तरीक़ों से साफ़ किए जाते हैं — नीम की दातून, मंजन, कोयला, नमक, और दुख की बात है कि गुल और गुड़ाखू भी। कुछ हानिरहित हैं, कुछ चुपचाप स्थायी नुक़सान करते हैं। डेंटिस्ट के रूप में हर एक पर हमारी ईमानदार राय यह रही।
गुल और गुड़ाखू — आज ही छोड़ें
साफ़ कहें तो: गुल, गुड़ाखू और तंबाकू-आधारित "दंत" मंजन असल में धुआँ-रहित तंबाकू हैं। इन्हें रोज़ सुबह मसूड़ों पर मलना सफ़ाई नहीं, बल्कि कैंसर पैदा करने वाली चीज़ की रोज़ाना ख़ुराक है — मुँह के सबसे नाज़ुक हिस्से पर। ये मसूड़े हटाते हैं, दाग़ करते हैं और मुँह के कैंसर का गंभीर ख़तरा बढ़ाते हैं। इन्हें छोड़ना सबसे ज़रूरी है।
कोयला, राख, ईंट का चूरा और नमक — बहुत रगड़ने वाले
ये "साफ़" करते लगते हैं क्योंकि खुरदरे हैं और ज़ोर से रगड़ते हैं। दिक़्क़त इसी रगड़ में है। इनेमल — दाँत का सख़्त बाहरी कवच — बहुमूल्य है और दोबारा नहीं बनता। सालों की रगड़ इसे पतला कर देती है, जिससे दाँत ज़्यादा पीले दिखते हैं, ठंडे-गरम पर झनझनाते हैं और घिसी जगहों पर जल्दी कीड़ा लगता है।
मंजन — लेबल पढ़ें
कई बाज़ारू मंजन बहुत रगड़ने वाले होते हैं और कुछ में तंबाकू होता है। लगभग सबके लिए सबसे सुरक्षित है फ़्लोराइड टूथपेस्ट, जो धीरे से साफ़ करता है और कीड़े से सक्रिय बचाव देता है — जो कोई पुराना चूरा नहीं देता।
नीम की दातून — सावधानी के साथ ठीक
ताज़ी, मुलायम नीम की दातून हल्के हाथ से इस्तेमाल करना हानिकारक नहीं, और नीम में हल्के जीवाणुरोधी गुण हैं। दो सावधानियाँ: इसे आरी की तरह न रगड़ें (मसूड़े छिलते हैं), और याद रखें इसमें फ़्लोराइड नहीं होता।
जो सचमुच काम करता है — आसान, सिद्ध तरीक़ा
- मुलायम ब्रश और फ़्लोराइड टूथपेस्ट, दिन में दो बार, ख़ासकर रात को।
- दो मिनट हल्के गोल घुमाव में साफ़ करें — ज़ोर लगाना सफ़ाई नहीं।
- दिन में एक बार दाँतों के बीच सफ़ाई।
- हर तंबाकू-आधारित उत्पाद से पूरी तरह दूरी।
- हर 6 महीने में प्रोफेशनल सफ़ाई।
पता नहीं आपकी सफ़ाई की आदत मदद कर रही है या नुक़सान? जनता डेंटल क्लिनिक, मुज़फ़्फ़रपुर में हमसे पूछें — हम आपके दाँतों के लिए ईमानदार, आसान सलाह देंगे। कॉल करें: 95726 63116।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गुल (तंबाकू मंजन) सुरक्षित है?
नहीं। गुल, गुड़ाखू और इस तरह के तंबाकू-आधारित दंत उत्पाद असल में धुआँ-रहित तंबाकू हैं। रोज़ मसूड़ों पर लगाने से मसूड़ों की बीमारी, दाग़ और मुँह के कैंसर का ख़तरा बढ़ता है। 'दंत' के नाम पर बिकने के बावजूद ये मुँह के लिए सबसे हानिकारक चीज़ों में से हैं — इन्हें पूरी तरह छोड़ें और फ़्लोराइड टूथपेस्ट अपनाएँ।
क्या कोयला या ईंट का चूरा दाँत सफ़ेद करने के लिए अच्छा है?
नहीं। कोयला, राख, ईंट का चूरा और नमक बहुत रगड़ने वाले (abrasive) हैं। पहले भले दाँत चमकते दिखें, पर समय के साथ ये इनेमल की रक्षा-परत घिसा देते हैं, जिससे नीचे का पीला हिस्सा दिखने लगता है और झनझनाहट होती है। यह नुक़सान स्थायी है — इनेमल दोबारा नहीं उगता।
क्या नीम की दातून इस्तेमाल करना ठीक है?
ताज़ी नीम की दातून हल्के हाथ से इस्तेमाल करने पर हानिकारक नहीं है और इसमें हल्के जीवाणुरोधी गुण होते हैं; बहुत लोग इसे सुरक्षित रूप से इस्तेमाल करते हैं। पर इसमें फ़्लोराइड नहीं होता और अक्सर ज़ोर से रगड़ी जाती है। ज़्यादातर लोगों के लिए मुलायम ब्रश और फ़्लोराइड टूथपेस्ट कीड़े से ज़्यादा भरोसेमंद बचाव देता है।