इलाज गाइड

डेंचर (बत्तीसी): प्रकार, खर्च और नए दाँतों की आदत कैसे डालें

लेखक: डॉ. प्रियंका त्रिपाठी, MDS · 16 जुलाई 2026 · 8 मिनट

दाँत गिर जाने के बाद सबसे बड़ी तकलीफ़ खाने की नहीं, आत्मविश्वास की होती है — लोग खुलकर हँसना और बोलना कम कर देते हैं। डेंचर उस कमी को भरने का सबसे सुलभ और आज़माया हुआ तरीक़ा है, बशर्ते वह ठीक से बना और ठीक से बैठा हो।

डेंचर होता क्या है?

डेंचर हटाए जा सकने वाले नक़ली दाँतों का सेट होता है, जिसे बोलचाल में बत्तीसी भी कहते हैं। यह गिरे हुए दाँतों की जगह लेता है और चबाने, बोलने तथा चेहरे की बनावट — तीनों को वापस सहारा देता है।

डेंचर के प्रकार

पूरा डेंचर (कंप्लीट डेंचर)

जब ऊपर या नीचे के जबड़े का कोई भी दाँत न बचा हो, तब पूरा सेट बनाया जाता है। यह मसूड़ों पर टिकता है और ऊपर के जबड़े में तालू की सतह से चिपककर पकड़ बनाता है।

आंशिक डेंचर (पार्शियल डेंचर)

जब कुछ अपने दाँत बचे हों, तब सिर्फ़ ख़ाली जगहें भरने के लिए बनाया जाता है। यह बचे हुए दाँतों के सहारे टिकता है, इसलिए इसकी पकड़ पूरे डेंचर से बेहतर होती है।

लचीला (फ़्लेक्सिबल) डेंचर

नरम, हल्के पदार्थ से बना, जिसमें धातु के हुक नहीं दिखते। पहनने में अधिक आरामदायक और देखने में बेहतर, पर हर मामले में उपयुक्त नहीं।

इम्प्लांट के सहारे वाला डेंचर

अगर बार-बार डेंचर के खिसकने की शिकायत हो, तो दो या चार इम्प्लांट लगाकर डेंचर को उन पर कसकर टिकाया जा सकता है। इसके बाद डेंचर खाते या बोलते समय हिलता नहीं। यह पारंपरिक डेंचर से बड़ा सुधार है।

ध्यान दें: डेंचर, ब्रिज और इम्प्लांट — तीनों के अपने-अपने फ़ायदे हैं। कितने दाँत गिरे हैं, हड्डी की स्थिति कैसी है और आपका बजट क्या है — यह देखकर ही सही सलाह दी जा सकती है। हम तीनों विकल्प खुलकर समझाते हैं और फ़ैसला आप पर छोड़ते हैं।

डेंचर बनने की प्रक्रिया

  1. जाँच: मसूड़ों और बची हुई हड्डी की स्थिति देखी जाती है। अगर कोई दाँत निकालना है, तो उसके बाद मसूड़ों को ठीक होने का समय दिया जाता है।
  2. छाप (इम्प्रेशन): मुँह की सटीक छाप ली जाती है — डेंचर की पकड़ पूरी तरह इसी की सटीकता पर निर्भर करती है।
  3. ट्रायल: मोम के ढाँचे में दाँत जमाकर आपको पहनाकर दिखाया जाता है, ताकि ऊँचाई, बनावट और रूप — तीनों जाँचे जा सकें। यहीं बदलाव करवा लेना सबसे आसान होता है।
  4. अंतिम डेंचर: तैयार डेंचर पहनाकर बैठक और बाइट जाँची जाती है।
  5. एडजस्टमेंट: पहले कुछ हफ़्तों में एक-दो बार छोटे समायोजन की ज़रूरत पड़ना सामान्य है।

शुरुआती दिक़्क़तें — और उनका समाधान

नया डेंचर पहनने के बाद कुछ बातें लगभग हर मरीज़ के साथ होती हैं। इन्हें पहले से जान लेना घबराहट कम कर देता है:

  • मुँह भरा-भरा लगना: पहले कुछ दिन सामान्य है। जीभ धीरे-धीरे जगह बना लेती है।
  • बोलने में फ़र्क़: कुछ शब्द शुरू में अटकते हैं। ज़ोर से पढ़ने का अभ्यास इसे कुछ ही दिनों में ठीक कर देता है।
  • ज़्यादा लार आना: कुछ दिनों में अपने आप सामान्य हो जाता है।
  • कहीं-कहीं घाव या रगड़: यह इंतज़ार करने वाली चीज़ नहीं है। दिखाएँ — एक छोटा-सा समायोजन आराम दे देता है।
कभी न करें: डेंचर को घर पर ख़ुद घिसने, काटने या गरम करके मोड़ने की कोशिश न करें। इससे उसकी बैठक स्थायी रूप से बिगड़ जाती है और अक्सर नया डेंचर बनवाना पड़ता है।

डेंचर की देखभाल

  • हर खाने के बाद डेंचर निकालकर पानी से धो लें
  • रोज़ रात को मुलायम ब्रश से साफ़ करें — डेंचर पर भी परत जमती है
  • रात में डेंचर निकालकर सादे पानी में रखें, ताकि मसूड़ों को आराम मिले
  • साफ़ करते समय नीचे पानी भरा बर्तन या तौलिया रखें — गिरने पर डेंचर टूट जाता है
  • गरम पानी में न डालें, इससे आकार बिगड़ सकता है
  • अगर अपने कुछ दाँत बचे हैं, तो उनकी सफ़ाई पर और ध्यान दें — वही डेंचर का सहारा हैं

मुज़फ़्फ़रपुर में डेंचर का खर्च

  • परामर्श: ₹200 — ज़रूरतमंद मरीज़ों और शिविरों में नि:शुल्क
  • पूरा डेंचर (कंप्लीट): ₹5,000 से शुरू
  • दाँत निकलवाना (ज़रूरत पड़ने पर): ₹300 से ₹3,000 तक, मामले के अनुसार

आंशिक डेंचर का खर्च बदले जाने वाले दाँतों की संख्या और चुनी गई सामग्री पर निर्भर करता है।

पारदर्शिता: डेंचर बनने से पहले ही आपको कुल खर्च बता दिया जाता है, और बाद के छोटे समायोजन के लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जाता। क्लिनिक ने 2019 के बाद से अपने शुल्क नहीं बढ़ाए हैं। (शुल्क अंतिम बार जुलाई 2026 में जाँचे गए।)

डेंचर बनवाने में देर न करें

कई मरीज़ वर्षों तक बिना दाँतों के रह जाते हैं। इससे दो नुक़सान होते हैं: एक, चबाना ठीक से न होने पर पाचन और पोषण दोनों पर असर पड़ता है — ख़ासकर बुज़ुर्गों में। दूसरा, जबड़े की हड्डी लगातार सिकुड़ती जाती है, और हड्डी जितनी कम बचेगी, डेंचर की पकड़ उतनी ही कमज़ोर होगी।

दाँत गिर चुके हैं और खाने-बोलने में तकलीफ़ है? जनता डेंटल क्लिनिक, मुज़फ़्फ़रपुर में डेंचर की जाँच और सलाह के लिए संपर्क करें — कॉल करें: 95726 63116

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डेंचर बनने में कितना समय लगता है?

आम तौर पर एक से दो सप्ताह में कुछ बैठकें लगती हैं — छाप लेना, ट्रायल और अंतिम फ़िटिंग। दाँत निकलवाने के बाद डेंचर बनाने से पहले मसूड़ों को ठीक होने के लिए कुछ हफ़्तों का समय दिया जाता है, ताकि डेंचर की बैठक सही रहे।

क्या डेंचर पहनकर सब कुछ खाया जा सकता है?

शुरुआत में नहीं। पहले कुछ हफ़्तों तक नरम भोजन छोटे टुकड़ों में और दोनों तरफ़ से चबाएँ। धीरे-धीरे मुँह और जीभ डेंचर के साथ तालमेल बना लेते हैं। बहुत चिपचिपी या बहुत सख़्त चीज़ें हमेशा सावधानी से खानी चाहिए।

डेंचर ढीला क्यों हो जाता है?

दाँत निकलने के बाद जबड़े की हड्डी धीरे-धीरे सिकुड़ती रहती है, इसलिए कुछ वर्षों बाद वही डेंचर ढीला महसूस होने लगता है। ऐसे में डेंचर को दोबारा फ़िट कराया (रीलाइन) या बदला जाता है। ढीले डेंचर को ऐसे ही पहनते रहना मसूड़ों में घाव बना देता है।

मुज़फ़्फ़रपुर में डेंचर का खर्च कितना है?

जनता डेंटल क्लिनिक में पूरा डेंचर (कंप्लीट डेंचर) ₹5,000 से शुरू होता है। आंशिक डेंचर का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि कितने दाँत बदलने हैं। जाँच के बाद पूरा अनुमान बता दिया जाता है।

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