स्वास्थ्य चेतावनी
दाँत टूटकर गिर जाए तो पहले 30 मिनट में क्या करें (और क्या कभी न करें)
खेलते समय गिरना, साइकिल से टकराना, या चेहरे पर चोट लगना — और एक दाँत पूरा बाहर। ऐसे में ज़्यादातर लोग दाँत को कपड़े में लपेटकर या पानी में डालकर अगले दिन डेंटिस्ट के पास पहुँचते हैं, और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। सही जानकारी हो, तो वही दाँत वापस लगाया जा सकता है। यह लेख उसी जानकारी के लिए है — इसे पढ़ लीजिए, ज़रूरत पड़ने से पहले।
स्थायी दाँत पूरा उखड़ जाए तो — क्रम से
- दाँत ढूँढ़ें और सही तरीक़े से उठाएँ। उसे हमेशा ऊपरी सफ़ेद हिस्से (क्राउन) से पकड़ें। नुकीली जड़ को बिल्कुल न छुएँ — उसी सतह पर वे जीवित कोशिकाएँ होती हैं जो दाँत को हड्डी से दोबारा जोड़ती हैं।
- अगर मिट्टी लगी हो, तो बहुत हल्के से धोएँ — दूध या नमक-पानी से, 10 सेकंड से ज़्यादा नहीं। रगड़ें नहीं, ब्रश न करें, साबुन या डेटॉल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
- हो सके तो उसी जगह वापस बिठा दें। बड़े बच्चों और वयस्कों में यह सबसे अच्छा विकल्प है। दाँत को सीधा उसी खाँचे में धीरे से दबाएँ और साफ़ रूमाल पर हल्के से काटकर उसे थामे रखें।
- अगर वापस न बिठा पाएँ, तो सही तरल में रखें। प्राथमिकता इस क्रम में: ठंडा दूध → नमक-पानी (सलाइन) → मरीज़ की अपनी लार। छोटे बच्चों में लार वाला विकल्प न चुनें, दाँत निगलने का ख़तरा रहता है।
- तुरंत डेंटिस्ट के पास पहुँचें। पहले 30 मिनट सबसे क़ीमती हैं। एक घंटे के बाद संभावना तेज़ी से घटने लगती है।
पानी में क्यों नहीं?
यह वह एक ग़लती है जो सबसे ज़्यादा दाँत बर्बाद करती है। जड़ की सतह पर पीरियोडॉन्टल लिगामेंट की जीवित कोशिकाएँ चिपकी होती हैं। दाँत का दोबारा जुड़ना पूरी तरह इन्हीं कोशिकाओं के ज़िंदा रहने पर निर्भर करता है।
सादा पानी शरीर के तरल जैसा नहीं होता — उसमें डालते ही ये कोशिकाएँ फूलकर फट जाती हैं और कुछ ही मिनटों में मर जाती हैं। दूध की संरचना शरीर के तरल के क़रीब होती है, इसलिए वह इन कोशिकाओं को घंटों तक जीवित रख सकता है। दूध लगभग हर घर और हर दुकान पर मिल जाता है — यही उसे सबसे व्यावहारिक विकल्प बनाता है।
बच्चे का दूध का दाँत उखड़ जाए तो
यहाँ नियम उल्टा है। दूध का दाँत वापस नहीं लगाया जाता। उसे वापस बिठाने की कोशिश में नीचे विकसित हो रहे स्थायी दाँत के अंकुर को स्थायी नुक़सान पहुँच सकता है।
ऐसे में साफ़ रूमाल से हल्का दबाव देकर ख़ून रोकें, बर्फ़ की सिकाई करें, और बच्चे को डेंटिस्ट के पास दिखाएँ — ताकि घाव, बाक़ी दाँतों और जबड़े की जाँच हो सके।
दाँत टूटा हो, पूरा न उखड़ा हो
- टुकड़ा टूटकर अलग हो गया हो: उस टुकड़े को भी दूध में रखकर साथ लाएँ — कई बार उसे वापस जोड़ा जा सकता है
- दाँत हिल गया या अपनी जगह से खिसक गया हो: उसे ज़बरदस्ती सीधा करने की कोशिश न करें; तुरंत दिखाएँ
- दाँत अंदर की ओर धँस गया हो: यह गंभीर है, उसी दिन दिखाना ज़रूरी है
- सिर्फ़ किनारा चटका हो और दर्द न हो: फिर भी जाँच कराएँ — दरारें बाद में गहरी होती हैं
कब यह सिर्फ़ दाँत की बात नहीं रहती
चेहरे की चोट में कुछ संकेत बताते हैं कि पहले अस्पताल जाना ज़रूरी है — बेहोशी या याददाश्त का धुँधलापन, लगातार उल्टी, कान या नाक से ख़ून या तरल आना, मुँह ठीक से बंद न होना, या जबड़े का टेढ़ा दिखना। ऐसी स्थिति में दाँत बाद की बात है; पहले आपातकालीन चिकित्सा लें।
बचाव — ख़ासकर बच्चों में
- क्रिकेट, कबड्डी या साइकिलिंग जैसे खेलों में माउथगार्ड का उपयोग करें
- बच्चों को मुँह में पेंसिल या खिलौना लेकर दौड़ने से रोकें
- घर में गीले फ़र्श और खुली सीढ़ियों पर ध्यान दें
- जिन बच्चों के आगे के दाँत बहुत बाहर निकले हों, उनमें चोट का ख़तरा अधिक होता है — समय पर ऑर्थोडॉन्टिक जाँच इस जोखिम को कम करती है
यह लेख किसी के काम आ सकता है — इसे अपने परिवार और बच्चों के स्कूल समूह में ज़रूर साझा करें। चोट लगने पर जनता डेंटल क्लिनिक, मुज़फ़्फ़रपुर में तुरंत संपर्क करें — कॉल करें: 95726 63116। फ़ोन पर बता दें कि दाँत उखड़ा है, ताकि आपके पहुँचने से पहले तैयारी की जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उखड़ा हुआ दाँत वापस लग सकता है?
हाँ। अगर स्थायी दाँत पूरा उखड़ जाए और सही तरीक़े से संभालकर तुरंत डेंटिस्ट तक पहुँचाया जाए, तो उसे वापस उसी जगह लगाया जा सकता है। सफलता समय पर निर्भर करती है — पहले 30 मिनट सबसे क़ीमती होते हैं, और एक घंटे के बाद संभावना तेज़ी से घटती है।
उखड़े दाँत को किसमें रखकर ले जाएँ?
सबसे अच्छा विकल्प ठंडा दूध है। दूध उपलब्ध न हो तो सामान्य नमक-पानी (सलाइन) या मरीज़ की अपनी लार में रखें। दाँत को सादे पानी में कभी न रखें — पानी जड़ की सतह पर मौजूद जीवित कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिन पर दाँत के दोबारा जुड़ने की पूरी संभावना टिकी होती है।
क्या बच्चे का दूध का दाँत वापस लगाया जा सकता है?
नहीं। दूध का दाँत उखड़ने पर उसे वापस नहीं लगाया जाता, क्योंकि ऐसा करने से नीचे विकसित हो रहे स्थायी दाँत के अंकुर को नुक़सान पहुँच सकता है। फिर भी बच्चे को डेंटिस्ट के पास ज़रूर दिखाएँ, ताकि घाव और बाक़ी दाँतों की जाँच हो सके।