बच्चों की दंत चिकित्सा
बच्चों के दाँतों में कीड़ा रोकने के दो आसान तरीक़े: सीलेंट और फ़्लोराइड
बच्चों के दाँतों में कीड़ा दुनिया की सबसे आम बचपन की बीमारी है — और सबसे आसानी से रोकी जा सकने वाली भी। दो सरल, दर्द-रहित उपाय मिलकर अधिकांश कैविटी रोक सकते हैं। इनमें से कोई भी महँगा या जटिल नहीं है, बस इनके बारे में जानकारी कम है।
बच्चों की दाढ़ों में कीड़ा सबसे ज़्यादा क्यों लगता है
अपने बच्चे की पीछे वाली दाढ़ की चबाने वाली सतह ध्यान से देखिए। वह चिकनी नहीं होती — उस पर गहरी दरारें और खाँचे बने होते हैं। ये खाँचे इतने बारीक होते हैं कि ब्रश का एक रेशा भी उनमें पूरा नहीं उतर सकता।
नतीजा यह होता है कि खाना और बैक्टीरिया उनमें जमकर बैठ जाते हैं और वहीं से कीड़ा शुरू होता है। यही वजह है कि बच्चों में अधिकांश कैविटी पीछे की दाढ़ों की चबाने वाली सतह पर मिलती हैं — भले ही बच्चा नियमित ब्रश करता हो।
उपाय 1: डेंटल सीलेंट
सीलेंट का विचार बहुत सीधा है — अगर दरारें साफ़ नहीं की जा सकतीं, तो उन्हें भरकर चिकना कर दो।
प्रक्रिया: दाँत को अच्छी तरह साफ़ करके सुखाया जाता है, फिर तरल सीलेंट खाँचों में बहाया जाता है और एक विशेष नीली रोशनी से जमा दिया जाता है। दाँत को काटा या ड्रिल नहीं किया जाता, सुई नहीं लगती, और पूरी प्रक्रिया कुछ मिनटों की होती है।
कब: पहली स्थायी दाढ़ लगभग 6 वर्ष में आती है (कई माता-पिता इसे दूध का दाँत समझ लेते हैं — यह स्थायी होती है और जीवनभर रहनी है)। दूसरी लगभग 12 वर्ष में। दोनों पर आने के कुछ महीनों के भीतर सीलेंट लगवाना आदर्श है।
कितने समय चलता है: कई वर्षों तक। हर जाँच में यह देखा जाता है कि सीलेंट सही जगह पर है या नहीं, और घिस जाने पर दोबारा लगाया जा सकता है।
उपाय 2: फ़्लोराइड
फ़्लोराइड इनैमल को मज़बूत बनाता है और शुरुआती, बहुत हल्के कीड़े को पलटने में भी मदद करता है। यह दो तरह से मिलता है:
- फ़्लोराइड टूथपेस्ट — रोज़ाना, उम्र के अनुसार सही मात्रा में
- फ़्लोराइड वार्निश — क्लिनिक में दाँतों पर लगाया जाने वाला लेप, जो कुछ मिनटों में हो जाता है और जोखिम वाले बच्चों में हर छह महीने पर दोहराया जा सकता है
बिहार में फ़्लोराइड को लेकर ज़रूरी सावधानी
यह हिस्सा ध्यान से पढ़ें, क्योंकि यहाँ की स्थिति बाक़ी जगहों से अलग है। बिहार के कई इलाक़ों के भूजल में फ़्लोराइड की मात्रा पहले से ही अधिक है। ऐसी जगहों पर अतिरिक्त फ़्लोराइड — ख़ासकर निगला हुआ — फ़ायदे की जगह नुक़सान करता है और दाँतों पर स्थायी दाग़ (फ्लोरोसिस) बना सकता है।
- बच्चों को फ़्लोराइड की गोली या सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल न दें
- छोटे बच्चों को टूथपेस्ट निगलने से रोकें — इसीलिए मात्रा कम रखी जाती है
- अगर आपके इलाक़े के पानी में फ़्लोराइड अधिक है, तो जाँच के समय यह ज़रूर बताएँ
विस्तार से पढ़ें: दाँतों पर पीले-भूरे दाग़ (फ्लोरोसिस)।
दूध के दाँतों की उपेक्षा सबसे आम भूल है
"दूध का दाँत है, गिर ही जाएगा" — यह सोच कई बच्चों को दर्द और स्थायी नुक़सान तक पहुँचा देती है। दूध के दाँत तीन काम करते हैं: चबाना, बोलने में मदद, और नीचे आने वाले स्थायी दाँत के लिए जगह बचाकर रखना।
अगर दूध का दाँत कीड़े की वजह से समय से पहले निकल जाए, तो बग़ल के दाँत उस जगह में सरक आते हैं और स्थायी दाँत के लिए जगह नहीं बचती — जिससे आगे चलकर टेढ़े दाँत और ब्रेसेस की नौबत आती है। विस्तार से पढ़ें: बच्चों के दूध के दाँतों की देखभाल।
घर पर क्या करें
- बच्चे के दाँत आते ही सफ़ाई शुरू करें — पहले नरम कपड़े से, फिर छोटे मुलायम ब्रश से
- 7–8 साल की उम्र तक ब्रशिंग की निगरानी करें — इससे पहले बच्चों में सही तरीक़े से ब्रश करने की क्षमता ही विकसित नहीं होती
- मीठा खाने की बारंबारता घटाएँ — दिन भर टॉफ़ी-बिस्किट सबसे बड़ा कारण है
- रात को दूध की बोतल मुँह में लेकर सुलाना बंद करें
- पानी को पहली पसंद बनाएँ, कोल्ड ड्रिंक और पैक जूस को नहीं
- पहली दंत विज़िट पहले जन्मदिन तक कराएँ, तकलीफ़ का इंतज़ार न करें
खर्च
बचाव हमेशा इलाज से सस्ता होता है। जनता डेंटल क्लिनिक में बच्चों का परामर्श ₹200 है (ज़रूरतमंद मरीज़ों और स्कूल शिविरों में नि:शुल्क), और बच्चों की भराई ₹200 से शुरू होती है। एक कैविटी का इलाज कराने से कहीं सस्ता है उसे रोक देना।
बच्चे की दाढ़ों की जाँच करानी है या सीलेंट के बारे में जानना है? जनता डेंटल क्लिनिक, मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की दंत चिकित्सा के लिए संपर्क करें — कॉल करें: 95726 63116।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डेंटल सीलेंट क्या होता है?
सीलेंट एक पतली सुरक्षात्मक परत होती है जो बच्चों की स्थायी दाढ़ों की चबाने वाली सतह पर लगाई जाती है। इन दाढ़ों पर गहरी दरारें और गड्ढे होते हैं जिनमें ब्रश के रेशे पहुँच ही नहीं पाते। सीलेंट उन दरारों को भरकर चिकना कर देता है, जिससे खाना और बैक्टीरिया वहाँ जम नहीं पाते।
सीलेंट कब लगवाना चाहिए?
पहली स्थायी दाढ़ आम तौर पर 6 वर्ष की उम्र के आसपास आती है और दूसरी 12 वर्ष के आसपास। सीलेंट इनके आने के कुछ ही महीनों के भीतर लगवाना सबसे अच्छा रहता है, यानी कीड़ा लगने से पहले।
क्या सीलेंट लगवाने में दर्द होता है?
बिल्कुल नहीं। इसमें न ड्रिल चलती है, न सुई लगती है और न दाँत काटा जाता है। दाँत को साफ़ करके सुखाया जाता है, फिर तरल सीलेंट लगाकर एक नीली रोशनी से जमा दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया कुछ मिनटों की होती है, और बच्चे आराम से बैठे रहते हैं।